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पृथ्वी – सामान्य ज्ञान बच्चों के लिए : SahiAurGalat

पृथ्वी को धरातल, धरती भी कहते है। पूरे ब्रम्हांड में पृथ्वी एक ऐसा ग्रह है जिस पर जीवन सबसे बेहतर है। हम सभी मनुष्य, जीव-जन्तु और पंक्षी पृथ्वी पर रहते है और जीवन गुजर बसर करते है। अतः पृथ्वी हम सबका घर है। यहाँ अलग अलग प्रकार के पेड़ और पौधे भी मिलते है। ये सभी पेड़ पौधे भी मनुष्यों और पशु पक्षियों की तरह सजीव है।

पृथ्वी का विस्तार कितने भाग में फैला हुआ है।

हम इसे मुख्यतः 2 भाग में बाँट सकते है, जल और स्थल। हालाँकि वायुमण्डल भी पृथ्वी का ही एक अंग यानी भाग है।

धरती पर जल का विस्तार कितना है।

दोस्तों जल यानी पानी हमारे धरातल पर इतना है कि आप अंदाजा नही लगा सकते है। पूरे पृथ्वी पर जल कही गंदा तो कही खारा यानी नमकयुक्त है और पीने योग्य पानी, पृथ्वी के अंदर सबसे ज़्यादा पाया जाता है।

जितने भी जलचर जीव है वो सभी पोखर, नदी, नहर, समुन्द्र आदि में रहते हैं। जलचर मतलब जल में रहने वाले जीव, जैसे – मछली, पानी वाले पौधे इत्यादि।

जल का विस्तार धरातल पर नदी, पोखर, नहर, तालाब, झरना और समुन्दर के रूप में है। समुन्द्र में पानी बहुत ज़्यादा है, इतना है कि अगर आप किनारे पर खड़े होकर देखेंगे तो आकाश और समुन्द्र का पानी कही दूर एक दूसरे से मिलते हुए नज़र आयेंगे। जबकि ऐसा वास्तव में नही है। आकाश और समुन्द्र के बीच का फासला उतना ही है, जितना कि जहां पर आप खड़े है वहाँ से है।

दोस्तों समुन्द्र में पानी का विस्तार बहुत ज्यादा है, इतना कि हम सोच नही सकते। इसीलिए हमारी नज़र धोखे में पड़ जाती है और हमें समुन्दर का पानी आकाश से मिलता दिखाई पड़ता है।

स्थल का विस्तार पृथ्वी पर कितना है।


दोस्तों स्थल का विस्तार भी जल की तरह ही बहुत ज़्यादा है। स्थल पर किसान खेती करते है। जीव पशु रहते हैं। मनुष्य अपना घर भी स्थल पर ही बनाते है।


खेलकूद के मैदान, स्कूल, पार्क, हॉस्पिटल, सड़क, गाँव, शहर, फैक्ट्री आदि ये सब भी पृथ्वी के स्थल वाले भाग पर होते है। हालाँकि आज के ज़माने में टेक्नोलॉजी इतनी बढ़ गयी है कि, अब जल वाले भाग में भी घर, सड़क आदि बनने लगे है। चीन, जापान जैसे देशों में पार्क, घर और सड़क समुन्दर के अंदर भी बन चुकी है।


किसानों द्वारा खेती, पार्क, खेल कूद का मैदान ये सब स्थल के छोटे छोटे भाग में होते है। जबकि गांव और शहर बड़े बड़े भाग में होते हैं।


स्थल पर भी कही से दूर देखने पर आकाश और स्थल एक साथ मिलते नज़र आएंगे, जबकि वास्तव में ऐसा नही होता है। ऐसा इसलिए होता है, की स्थल का भी भाग यानी विस्तार हमारे सोच से परे है। जिसे हमारी आंखे इसका सही आंकड़ा नही लगा सकता है।

वायुमंडल का विस्तार पृथ्वी पर कितना है

वायु-मण्डल यानी हवा का क्षेत्र। पूरी धरातल चारों दिशाओं से हवा से घिरी हुई है। सभी सजीव यानी मनुष्य, पशु, पंछी, हर तरह के जीवों को हवा की आवश्यकता होती है। हवा नही रहेगी तो हम सब मर जायेंगे।

पूरे वायु मंडल में भिन्न भिन्न तरह के हवा हैं। जैसे – ऑक्सीजन, कार्बन डाई ऑक्साइड, नाइट्रोजन आदि। इस धरातल पर रहने वाले सभी सजीव के शरीर को ज़िंदा रखने के लिए हवा का होना उतना ही ज़रूरी है, जितना कि पानी और भोजन का होना ज़रूरी है। अतः अब आपको समझ आ गया होगा कि वायुमंडल पृथ्वी का कितना महत्वपूर्ण भाग है।

धरातल के बारे में कुछ सही और गलत तथ्य


क्या आपको मालूम है कि हमारी धरती माँ यानी पृथ्वी का आकार कैसा है। इसका सही उत्तर है पूरी तरह लगभग गोल। कई शतक साल पहले के लोगों का मानना था कि पृथ्वी चपटी है। क्योंकि समुन्द्र और स्थल कही दूर देखने पर आकाश से मिलता नज़र आता था। जिससे लोगों को लगता था, की अगर हम दूर की यात्रा करेंगे तो वही मिल रहे धरातल से आकाश के पास पहुच जाएंगे और हम नीचे गिर जाएंगे। इसी लिए लोग पहले दूर की यात्रा करने से डरते थे।


समय बीतता गया, और कुछ दिलेर नाविकों ने पूरी पृथ्वी का भ्रमड़ करने का फैसला लिया। और निकल पड़े ये लोग, बिना रुके सालों तक आगे बढ़ते रहे, नाव से समुन्द्र के रास्ते, पैदल या घोड़ा गाड़ी से स्थल के रास्ते। सालों सफर करने के बाद ये लोग अपने उसी स्थान के आस पास पहुँचे जहाँ से ये लोग चले थे। और यह तभी संभव है जब हम किसी गोल चीज़ का भ्रमड़ करेंगे। इस प्रकार यह सिद्ध हो गया कि पृथ्वी गोल है।

आज के आधुनिक समय मे वैज्ञानिको ने जब चंद्रमा की यात्रा की तब वहाँ से पृथ्वी साफ साफ गोल दिखाई दिया, प्रमाण के तौर पर कई चित्र भी खींचा गया। जिसमें धरातल साफ साफ गोल दिखाई दिया। अब इस बात में कोई संदेह नही है कि पृथ्वी गोल है या चपटी। हमारी धरातल, धरती अंग्रेजी में कहें तो अर्थ (Earth) गोल है।


धन्यवाद!

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