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मूर्च्छा या बेहोशी : कारण, लक्षण, ईलाज़ – SahiAurGalat

मूर्च्छा या बेहोशी कारण-लक्षण-ईलाज़ फोटो

शरीर के किसी भी अंग में गड़बड़ी के कारण मूर्च्छा या बेहोशी आ सकती है। अर्थात इस बीमारी के होने के कई पहलू हो सकते है। वैसे दिमाग की चेतन अवस्था शून्य होने के कारण मूर्च्छा या बेहोशी आ सकती है। हालाँकि दिमागी चेतन शून्यता शरीर में होने वाली बहुत सारी दिक्कतों के वजह से होती है।

मानव शरीर का दिमाग एक ब्रम्हांड से कम नही होता है। इसमे न जाने कितनी सारी नशों का तार बिछा होता है। किसी मानसिक समस्या के चलते किसी भी एक नश में खून के बहाव के रुकने से मूर्च्छा या बेहोशी आ सकती है। तथा किसी नश के फटने के कारण ज्यादा खून बह जाने से भी बेहोशी आ जाती है।

मूर्च्छा या बेहोशी का कारण

  • ह्रदय कमजोरी के कारण।
  • शारीरिक कमज़ोरी के वज़ह से।
  • अकस्मात शोक के कारण।
  • अत्यधिक चिन्ता के कारण।
  • ज्यादा मानसिक तनाव के कारण।
  • असहनीय प्रबल दवाईयों के सेवन के कारण।
  • स्त्रियों के मासिक धर्म रुकने के कारण।
  • अत्यधिक नशा के सेवन के कारण।

मूर्च्छा या बेहोशी के लक्षण

  • चक्कर आना।
  • आँखों के सामने धुधुलापन महसूस होना। यानि दृष्टि विहीन होना।
  • ज्यादा बेचैनी महसूस होना।
  • अचानक ज्यादा थकावट लगना।

रामबाण घरेलु जड़ी-बूटी उपचार

  1. नाक में लोबान (Frankincense) की धुँआ देने से मूर्च्छा ठीक हो जाता है।
  2. काली मिर्च को बारीक पीसकर नाक में डालकर फूँक मारें। मूर्छा खत्म हो जाता है।
  3.  काली मिर्च, नमक, शहद और मैनसिल एक साथ मिलाकर बारीक पीसकर काजल की तरह आँखों में लगाने से बेहोशी दूर हो जाती है।
  4. कपूर, चुना और नौसादर इन तीनों को बारीक़ पिसकर मूर्छित व्यक्ति को सुंघाने से बेहोशी ठीक हो जाती है।

आयुर्वेदिक चिकित्सा उपचार

  1. ” अश्वगंधारिष्ट ” रोजाना सुबह शाम खाना खाने के बाद 25-30 मिलीग्राम समान मात्रा में पानी के साथ लेने से, बार-बार आने वाली मूर्च्छा और बेहोशी से छूटकारा मिल जायेगा।
  2. रोजाना ” मांस्यादि क्वाथ ” के सेवन से मूर्च्छा और बेहोशी में फायदा मिलता है।



कुछ ज़रूरी बातों का रखें ध्यान

  • बेहोश अथवा मूर्छित व्यक्ति को हमेशा खुले स्थान पर रखें। अर्थात उसके आसपास भीड़ इक्कट्ठा न होने दें।
  • इस अवस्था में पीड़ित के कपड़े खोलकर ढीले कर दें।
  • अच्छे से साँस ले सके इसके लिए उसे जितना हो सके उतना हवा दें या लगने दें।
  • जब बेहोश अथवा मूर्छित व्यक्ति का शरीर ठण्डा पड़ने लगे तब उसके हाथ तथा तलवे पर रगड़े।
  • इस बिमारी से बचने के लिए रोजाना नंगे पाँव 1-2 घंटे टहला करें।
  • रोज खुली हवा में व्यायाम करें।
  • रोज़ाना समय पर पुष्ट आहारहित भोजन करें।
  • ऊपर बताये गए उपचार का ज्यादा इस्तेमाल न करें अर्थात फायदा न मिलने पर तुरंत किसी नजदीकी डॉक्टर से संपर्क करें।

धन्यवाद !



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