विसर्ग संधि और इसके नियम तथा भेद क्या क्या हैं – Sahi Aur Galat

जब विसर्ग (:) के बाद स्वर या व्यंजन आये तब विसर्ग मे जो परिवर्तन आता है, उसे ही विसर्ग संधि कहते है। जैसे – यशः + दा = यशोदा

स्वर संधि किसे कहते हैं?

व्यंजन संधि क्या होता है?

विसर्ग संधि के नियम

इसके निम्नलिखित सात ‘7’ नियम हैं

पहला नियम – ओ का विसर्ग हो जाना

यदि विसर्ग से पूर्व ‘अ’ तथा बाद मे ‘अ’ अथवा प्रत्येक वर्ग का तीसरा, चौथा, पाँचवा वर्ण हो अथवा य्, र्, ल्, व्, ह् मे से कोई हो तो ओ का विसर्ग हो जाता है।

जैसे – अधोगति = अधः + गति
तपोबल = तपः + बल
मनोयोग = मनः + योग
मनोहर = मनः + हर
तपोभूमि = तपः + भूमि
पयोधन = पयः + धन
मनोनुकूल = मनः + अनुकूल

अपवाद – पुनः और अतः मे विसर्ग का र् हो जाता है।पुनः + मुद्रण = पुनर्मुद्रण
अंतः + धान = अंतर्धान
पुनः + जन्म = पुनर्जन्म
अंतः + अग्नि = अन्तरग्नि

दूसरा नियम – च्, छ्, श् का श् हो जाना

यदि विसर्ग के पहले स्वर हो और बाद मे च्, छ्, अथवा श् हो तब, विसर्ग श् मे बदल जाता है।

जैसे –
निः + चर = निश्चर ; निः + छर = निश्छर ; निः + शक = निश्शक ; दुः + चर = दुश्चर

तीसरा नियम –

जब कभी विसर्ग से पहले अ, आ हो तथा बाद मे कोई भी स्वर हो तब विसर्ग का विलुप्त हो जाता है।

जैसे – निः + रस = नीरस ; निः + रोग = निरोग

चौथा नियम – विसर्ग का र् हो जाना

विसर्ग के बाद ‘ य्, र्, ल्, व, ह् ‘ अथवा कोई स्वर, तीसरा, चौथा, पाँचवा वर्ग का वर्ण हो तथा पहले अ और आ को छोड़कर किसी दूसरे स्वर के होने से विसर्ग र् मे बदल जाता है।

जैसे – निः + धारण = निर्धारण ; निः + धन = निर्धन
आशिः + वाद = आशीर्वाद
वहिः + मुख = वहिर्मुख
दुः + बल = दुर्बल

पाँचवा नियम –

विसर्ग के बाद ” क्, ख ” , ” ट्, ठ ” , ” प्, फ ” और पहले इ, उ हो तब विसर्ग ष मे परिवर्तित हो जाता है।

जैसे – निः + प्राण = निष्प्राण
धनुः + टंकार = धनुष्टंकार
दुः + फल = दुष्फल

छठवाँ नियम –

विसर्ग के बाद त् और स् होने से, विसर्ग का स् मे परिवर्तन हो जाना। जैसे –

नमः + ते = नमस्ते
दुः + साहस = दुस्साहस
अंतः + ति = अंतस्ति

सातवाँ नियम – संधि मे कोई परिवर्तन नही होना

यदि विसर्ग के के बाद क्, ख्, प्, फ् आये तब विसर्ग मे कोई बदलाव नही होगा। जैसे —

अंतः + काल = अंतःकाल ; अंतः + खण्ड = अंतःखण्ड ; अंतः + करण = अंतःकरण ; अधः + पतन = अधःपतन ; अंतः + फल = अंतःफल


धन्यवाद !

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