White Hat and Black Hat SEO : Types of SEO in Hindi – SahiAurGalat

White और Black Hat SEO का फोटो

सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन (SEO) दो प्रकार का होता है। पहला वाइट हैट एस.इ.ओ. (White Hat SEO) और दूसरा ब्लैक हैट एस.इ.ओ. (Black Hat SEO)। ये दोनों ही आपके वेबसाइट की श्रेणी यानी रैंकिंग (Ranking) को सर्च इंजन रिजल्ट में बेहतर नंबर पर रखने का काम करती हैं।

 लेकिन ! इन दोनों में से एक आपके वेबसाइट की रैंकिंग और ट्रैफिक को बिलकुल बेकार कर सकती है। अगर कुछ ज्यादा हो गया तो, सर्च इंजन (जैसे- google, yahoo, इत्यादि) आपकी वेबसाइट को अस्थायी या स्थायी रूप से हमेशा के लिए सर्च लिस्ट से बाहर भी कर सकती है।

अब ऐसा कुछ भयंकर अनहोनी होने से बचने के लिए। यह जानना ज़रूरी है की, वाइट हैट एस.इ.ओ. (White Hat SEO) और ब्लैक हैट एस.इ.ओ. (Black Hat SEO) में से कौन सा SEO इस्तेमाल करना सही रहेगा और कौन सा नहीं।

क्या आपने SEO Techniques (ऑन पेज और ऑफ पेज SEO) के बारे मे पढ़ा : अगर नही तो इसे ज़रूर पढ़े, क्यूंकी इसी के इस्तेमाल के जरिये आप अपनी वैबसाइट या ब्लॉग की रैंकिंग को बढ़ा सकते हैं। और सर्च रिज़ल्ट मे ऊपर ला सकते हैं।



1. वाइट हैट एस.ई.ओ. (White Hat SEO)

(A) वाइट हैट एस.इ.ओ. क्या है ? :-

  • इसके अंतर्गत इस्तेमाल की जाने वाली हर एक तकनीक व प्रक्रिया, जिससे किसी वेबसाइट की रैंकिंग सर्च रिजल्ट्स में सबसे ऊपर हो सके। सभी पुरी तरह से हर एक सर्च इंजन के “नियम और नीतियों (Rules & Policies)”का पालन  करती हैं।
  • वाइट हैट SEO तकनीक और प्रक्रिया पूरी तरह से “मानव श्रोत (Human Audience)” यानी केवल आर्गेनिक सर्च रिजल्ट पर निर्भर करती है। न की सर्च इंजन पर!
  • White Hat SEO का इस्तेमाल सामान्यतः दीर्घकालिक (Long-Term) वेबसाइट के लिए करते है। इसे “नैतिक सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन” यानी Ethical SEO भी कहते हैं।

(B) इस तकनीक का इस्तेमाल कैसे होता है ? :-

  • वेबसाइट का डिजाईन पढ़ने वाले के हिसाब से अनुकूल बनाना।
  • बहुत ही “आला दर्जे का लेख (Niche Content)” लिखना, जो पूर्ण रूप से पढ़ने वाले के लिए संतोषजनक (Satisfying) हो।
  • बैकलिंक्स (Backlinks) का सही इस्तेमाल कर अपने दुसरे पेज या पोस्ट को जोड़ना।
  • अपने पोस्ट में कीवर्ड एनालिसिस (Keywords Analysis) के माध्यम से कीवर्ड का सही इस्तेमाल करना।
  • अपने वेबसाइट की सोशल नेटवर्किंग पेज (जैसे – facebook, youtube, twitter, इत्यादि) को जोड़कर, हर एक पोस्ट को सार्वजनिक रूप से (publicly) शेयर करना।

(C) निष्कर्ष (Conclusion) :-

बिलकुल साफ-सुथरा और उच्च-स्तरीय तकनीक है। थोड़ा समय लगेगा, लेकिन स्थायी रैंकिंग मिलेगा वो भी दीर्घकालीन समय के लिए।

2. ब्लैक हैट एस.इ.ओ. (Black Hat SEO)

(A) ब्लैक हैट एस.इ.ओ. क्या है ? :-

  • इसके अंतर्गत इस्तेमाल की जाने वाली हर एक प्रक्रिया व तकनीक, सीधे सर्च इंजन पर असर डालती है। नतीजन वेबसाइट की रैंकिंग सर्च रिजल्ट्स में बड़े ही तेज़ी से बढती है। लेकिन ये सर्च इंजन के “नियम और नीतियों” (Rules & Policies) के बिलकुल खिलाफ़  होती हैं।
  • ब्लैक हैट एस.इ.ओ. में झाँसा देने वाली तकनीक का इस्तेमाल कर पूरी तरह से केवल सर्च इंजन पर निशाना साधा जाता है।
  • Black Hat SEO का इस्तेमाल कर सिर्फ और सिर्फ क्षणिक समय के लिए वेबसाइट का इस्तेमाल कर पाएंगे।
  • इसके इस्तेमाल से आपकी वेबसाइट को सर्च इंजन्स “कुछ दिन या फिर हमेशा” के लिए रोक लगा देगी।
  • इसे “अनैतिक सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन (Unethical SEO)” या “स्पैमडेक्सिंग (Spamdexing)” कहते है।

(B) इस तकनीक का इस्तेमाल कैसे होता है ? :-

  • कीवर्ड स्टफिंग (Keyword Stuffing) का इस्तेमाल करके – मतलब कीवर्ड का आवश्यकता से अधिक (1-2% से ज्यादा) इस्तेमाल करना।
  • शब्द छुपाना (Hiding Text)।
  • किसी शब्द का रंग, पेज के बैकग्राउंड के रंग का करना।
  • नकली पोस्ट (Duplicate Content) लिखना – पोस्ट के टाइटल के नाम से बिलकुल अलग पोस्ट लिखना।
  • असंबंधित कीवर्ड (Unrelated Keyword) का टैग करके – जैसे टॉपिक मेडिकल से सम्बंधित हो और टैग्स (Tags) इंजीनियरिंग से सम्बंधित करना।
  • किसी खास “यू.आर.एल. पेज (URL’s page)” की रैंकिंग बढ़ाने के लिए उसके लिंक्स (lings) को अपने वेबसाइट पर बेचना।
  • पेज का अदला-बदली करना (page swapping) – मतलब किसी वेबसाइट की रैंकिंग बढ़ने के बाद उसको पूरी तरह से बदल देना।
  • Meta & Java Script Redirects का शातिराना तरीके से इस्तेमाल करके।
  • डोरवे पेज (doorway page) के ज़रिये।
  • क्लोकिंग (cloaking) के ज़रिये।

(C) निष्कर्ष (Conclusion) :-

यह बड़ा ही शातिराना तरीका है लेकिन नतीजा बड़ा ही खौफनाक होता है। इसका इस्तेमाल निम्न-स्तरीय तकनीक के रूप में कुछ लोग करते है। यह बड़ा ही कम समय में अच्छा रैंकिंग देता है, परन्तु “अस्थायी तथा अल्पकालीन (Unsteady and Short-Term)” होता है।



White और Black Hat SEO के बारे मे सही और ग़लत तथ्य

वास्तविकता यह है की आये दिन सभी सर्च इंजन्स अपने अल्गोरिथम (algorithm) में कुछ न कुछ फेर बदल करती रहती हैं। तो सवाल ये उठता है की वाइट और ब्लैक एस.इ.ओ. में इस्तेमाल की जाने वाली कोई भी तकनीक या प्रक्रिया कभी भी बदल सकती है? हाल ही में एक खबर आयी है की गूगल ने एक नए अल्गोरिथम का इजाद किया है, जो ब्लैक हैट एस.इ.ओ. समुदाय से संबंद रखता है। जिसका नाम “Fred” (Unconfirmed Google Ranking Update) बोला जा रहा है। अब ऐसे में हम सबके लिए सबसे सटीक और सही तरीके का इस्तेमाल करने में ही समझदारी रहेगी।

तो बस इसी के साथ आज की टॉपिक वाइट हैट एस.इ.ओ. और ब्लैक हैट एस.इ.ओ. की बातों को विराम देते हुए, मै ये उम्मीद करता हु की आपको ये सब जानकारी बड़ी ही ज्ञानवर्धक लगी होगी। और साथ ही साथ आप मुझे कमेंट बॉक्स में यह ज़रूर लिखे की आपके लिए आज का ज्ञान हर मायनों में कितना सही और गलत लगा। धन्यवाद!


धन्यवाद !

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